Wednesday, October 17, 2007

महा केला

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(इस कविता का सम्पूर्ण रस लेने हेतु श्री हरिवंश राय बच्चन साहब के महाकाव्य मधुशाला को अपने मन में रखें) (गूगल rocks)
(For non-kgpians, it just enough to know that केला होना == getting into unexpected and undesirable circumstances) (in a very broad sense though)

दुनिया भर के केलों की है आज बनाई यह माला,
जिसको पढ़ कर हाय करेगा आज हरेक पढने वाला,
ये केले मैंने देखे हैं, जग कहाँ समझ पायेगा,
केले का तो दर्द जानता है केला सहने वाला...

कटु अनुभवों की स्मृति में जाग उठता कभी केला,
कभी-कभी तो यूं लगता है, जीवन केले का मेला,
जिस पर बीते वो रोता है, जो देखे हँसता जाता है,
समझ ना आता है, केला है या है केले का ठेला...

काम ही करने को हर्षित हो घर से चले करने वाला,
सामने आ जाता है पर, केलों से भरा गन्दा नाला,
आलस तन में है इतना कि काम करें कुछ, मन ही नहीं,
और करें तो बीच में आ जाता है ये केला साला...

दुनिया में हैं राहें कई, जिस राह चले चलने वाला,
सच तो है यही, हर राह में है उसका ही दिल जलने वाला,
जीवन में शाश्वत कुछ भी नहीं, सच है जो कुछ तो इतना है,
हर राह में है हर सज्जन को कोई केला मिलने वाला...

सफल कार्य की इच्छा ही जब बन जाये जीवन-माला,
जीवन में सुख की जब तलाश में निकल पडे चलने वाला,
यह ज्ञान नहीं कहाँ जाएगा, कुछ तय भी नहीं क्या पायेगा,
तय यह है, मिलना है तब भी एक सडा केला काला...

उम्मीद ही है जिसने जीवन भर निराशाओं को है टाला,
उम्मीद का ही दम भरता है हर काम में जय करने वाला,
उम्मीद से जीवन चलता है, उम्मीद से दुनिया चलती है,
उम्मीद यही है, पाऊँ कोई एक राह बिना केले वाला...

मैं KGPian, कुलोध्भव (legacy) मेरे सीनियर ने ऐसा डाला,
मेरे शरीर में भी होनी थी कुछ सत्तर प्रतिशत हाला (शराब),
हाला से ही मैंने तौबा की, जो ना करता तो खुश होता,
कुछ तो मिल जाता हर रोज़ के केलों से लड़ने वाला...

आज के जग में जी नहीं सकता सब का भला करने वाला,
जो जी भी ले तो खुश तो रहने ही ना देगा कोई जग वाला,
मेरी बात मान तो अब से तू भी सहना छोड़ इन्हें,
केले से डरना छोड़, तू ही बन जा केला करने वाला...

केले से डरना छोड़, तू ही बन जा केला करने वाला...